देवी दुर्गा उमा, विश्व जननी रमा ...| Bhajan - 85 | Shri Devi Durga Maa Bhajan | Devi Durge Uma Viswa Janani Rama Mat Tara ...
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देवी दुर्गा उमा, विश्व जननी रमा, मात तारा,
एक जगदम्बा तेरा सहारा ! (२)
तू ही वैष्णवी मोह माया, तूने सारे जग को बनाया।
चरण कमलों में माँ, रहता मस्तक नवा, यह हमारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
शैलजा स्कन्द माता भवानी, पार्वती भद्रकाली मृडाणी।
सर्व बुद्धि प्रदे, अष्ट सिद्धि वर दे, त्रिपुरारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
पुण्यवानों के घर सम्पदा तू, पापियों के भवन आपदा तू।
कुल की लज्जा तू ही, साधु श्रद्धा तू ही, गुण अपारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
जिनके मुंडन की गले मालिका हैं, सृञ्जति सञ्जति तालिका हैं।
रूप विकराली का, चण्डिका कालिका रुद्रतारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
मन वचन दोनों ने हार खाई, तेरा माया नहीं पार पाई।
क्या करें निर्वचन, वेद नेति कथन, करके हारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
हैं हज़ारों ही अपराध मेरा, हूँ अधम पातकी तो भी तेरा।
दुष्ट होवे यदा, तो भी माँ को सदा, पुत्र प्यारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
तेरी ज्योति से उदज्योति दिवाकर, तव प्रभा से सुशोभित सुधाकर।
देवी सेवक पर हो, दया की नजर का इशारा।।
एक जगदम्बा तेरा सहारा !
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