नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण .. | Bhajan - 105 | Tulsi Vani - Sundar Kaya Bhajan | Nar Main Hai Narayan Bande ...

|| नर में है नारायण बन्दे ||

दोहा 
तुलसी या संसार में, मिलिये सबसे धाय ।
ना जाने किस रूप में, नारायण मिल जाय ।।

काशी घूम ले मथुरा घूम ले, घूम ले चाहे वन वन ।
नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।।

बोलो जय नारायण, बोलो जय नारायण ।।
ओ बोलो जय नारायण, बोलो जय नारायण ।।

पहन के भगवा, तिलक लगाके, बने तू संत ज्ञानी ।
हो गया मस्त मलंग न पीड़ा किसी की तूने जानी - २ |
विभूति कमण्डल, गले में माला, व्यर्थ है माथे चन्दन ।
नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।।

दया धर्म चाहे दान करो, ये किसी काम नहीं आते ।
दीन दुखी निर्धन को जब तक, गले नहीं लगाते - २ ।
पर मेरा नारायण होता है, इसी बात में प्रसन्न ।
नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।।

ईश्वर के हैं बन्दे सबको रूप उसी का मानो ।
ना कोई ऊँचा ना कोई नीचा, सबको एक ही जानो - २ ।
सबसे उत्तम पूजा यही है, सबसे बड़ा ये धन ।
नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।।
ओ बोलो जय नारायण, बोलो जय नारायण ।।

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