मुक्ति भजन (अंतिम इच्छा) - इतना तो करना स्वामी .....| Bhajan - 97 | Shri Krishna Sanwara Bhajan | Itna To Karna Swami Jab Praan Tan Se Nikle ...

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दोहा :

कागा सब तन खाइयो, चुन चुन खाइयो माँस ।

दो नैना मत खाइयो, प्रभु मिलन की आस ।।

 

इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले।

गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले ।।१।।

श्रीगंगा जी का तट हो, यमुना का बंशी-बट हो ।

मेरा सांवरा निकट हो, जब प्राण तन से निकले ।।२।।

श्रीवृन्दावन का स्थल हो, मेरे मुख में तुलसी दल हो ।

विष्णु-चरण का जल होजब प्राण तन से निकले ।।३।।

सन्मुख सांवरा खड़ा हो, मुरली का स्वर भरा हो ।

तिरछा चरण धरा होजब प्राण तन से निकले ।।४।।

सिर सोहना मुकुट हो, मुखड़े पै काली लट हो ।

यही ध्यान मेरे घट होजब प्राण तन से निकले ।।५।।

केसर तिलक हो आला, मुख चन्द्र सा उजाला ।

डालूँ गले में मालाजब प्राण तन से निकले ।।६।।

कानों जड़ाऊँ बाली, लटकी लटें हौ काली ।

देखू छटा निरालीजब प्राण तन से निकले ।।७।।

पीताम्बरी कसी हो, होठों पै कुछ हँसी हो।

छवि यह ही मन बसी होजब प्राण तन से निकले ।।८।।

पचरंगी काछनी हो, पट-पीत से तनी हो ।

मेरी बात सब बनी हो, जब प्राण तन से निकले ।।९।।

पग थो तृषा मिटाऊँ, तुलसी का पत्र पाऊँ ।

सिर चरण रज लगाऊँजब प्राण तन से निकले ।।१०।।

आना अवश्य आना, राधे को साथ लाना ।

दर्शन मुझे दिखानाजब प्राण तन से निकले ।।११।।

जब कण्ठ प्राण आवे, कोई रोग ना सतावे ।

यम दरश न दिखावेजब प्राण तन से निकले ।।१२।।

मेरा प्राण निकले सुख से, तेरा नाम निकले मुख से ।

बच जाऊँ घोर दुःख सेजब प्राण तन से निकले ।।१३।।

उस वक्त जल्दी आना, नहीं श्याम ! भूल जाना ।

मुरली की धुन सुनानाजब प्राण तन से निकले ।।१४।।

सुधि होवे नाहिं तन की, तैयारी हो गमन की ।

लकड़ी हो ब्रज-वन कीजब प्राण तन से निकले ।।१५।।

यह नेक सी अरज है, मानों तो क्या हरज है ।

कुछ आपका फरज हैजब प्राण तन से निकले ।।१६।।

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