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बाबा की किरपा जिसपे हो जाये, मौज उड़ाये | Baba Ki Kirpa Jispe Ho jaye, Mauj Udaye | Bhajan 178

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  बाबा की किरपा जिसपे हो जाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये, ले ले तू नाम ले ले, बाबा का नाम ले ले, सुबह को श्याम ले ले, बाबा की किरपा जिस पे हो जाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये || चाहे गरीब हो, चाहे फ़कीर हो, चाहे बुरी से बुरी, उस की तकदीर हो, बाबा दयालु, सब को निभाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये || बाबा की किरपा जिसपे हो जाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये || पीतल की सोना, कंकर का मोती, बन जाये पल में, किरपा जो होती, पल में करिश्मा, करके दिखाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये || बाबा की किरपा जिसपे हो जाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये || बाबा के बेटे, दुःख नहीं पाते, वनवारी हर दम, खुशियां मनाते, भक्तो का दुःख ले, खुद ही उठाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये || बाबा की किरपा जिसपे हो जाये, मौज उड़ाये मौज उड़ाये ||

मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे राम आएँगे | Meree Jhopadee Ke Bhaag, Aaj Khul Jaenge, Ram Aaenge | Bhajan 177

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मेरी झोपड़ी के भाग ,  आज खुल जाएंगे , राम आएँगे , राम आएँगे आएँगे ,  राम आएँगे , मेरी झोपडी के भाग ,  आज खुल जाएंगे , राम आएँगे ॥ राम आएँगे तो ,  आंगना सजाऊँगी , दिप जलाके ,  दिवाली मनाऊँगी , मेरे जन्मो के सारे ,  पाप मिट जाएंगे , राम आएँगे , मेरी झोपडी के भाग ,  आज खुल जाएंगे , राम आएँगे ॥   राम झूलेंगे तो ,  पालना झुलाऊँगी , मीठे मीठे मैं ,  भजन सुनाऊँगी , मेरी जिंदगी के ,  सारे दुःख मिट जाएँगे , राम आएँगे , मेरी झोपडी के भाग ,  आज खुल जाएंगे , राम आएँगे ॥   मैं तो रूचि रूचि ,  भोग लगाऊँगी , माखन मिश्री मैं ,  राम को खिलाऊंगी , प्यारी प्यारी राधे ,  प्यारे श्याम संग आएँगे , श्याम आएँगे , मेरी झोपडी के भाग ,  आज खुल जाएंगे , राम आएँगे ॥   मेरा जनम सफल ,  हो जाएगा , तन झूमेगा और ,  मन गीत गाएगा , राम सुन्दर मेरी ,  किस्मत चमकाएंगे , राम आएँगे , मेर...

मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी .. | Matwali Mehendi Ae.. Dadi Ke Hatha Rachgi | Dadi Bhajan : 180

  मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी तर्ज : नखरालो देवरियो  मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी हाथां रचगी...माँ के हाथां रचगी... कामण गारी मेंहदी ए,दादी के हाथां रचगी... हे अनमोल सुहाग निशानी,तेरी किस्मत न्यारी दादी जी के हाँथ रची तू,लागे प्यारी प्यारी श्यामल गारी मेंहदी ए,हाथां की शोभा बणगी मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी घनी राचणी मेंहदी गंगाजल में म्हे घुलवायी चांदी की चौकी पर बैठी दादी हाँथ मण्डाई जादूगारी मेंहदी ए,दादी पर जादू करगी मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी सर्व-सुहागन हे बड़भागान तन्ने हाँथ रचावे लाल सुरंगी रचकर तू हाथां को मान बढ़ावे बड़ी प्यारी मेंहदी ए,दादी के मन बसगी मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी मेंहदी तेरा भाग अनोखा,दादी के मन भायी दादी जी किरपा ताईं तरसे लोग-लुगाई प्यारी-प्यारी मेंहदी ए,हरष के हिये रमगी मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी मतवाली मेंहदी ए दादी के हाथां रचगी हाथां रचगी...माँ के हाथां रचगी... कामण गारी मेंहदी ए,दादी के हाथां रचगी...

ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया | Odho Dadi Mhari Bhi Chunariya | Dadi Bhajan - 179

  ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया                                        तर्ज : खम्मा खम्मा ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया, शान से ल्याया थारा, टाबरिया थारा बालकिया, ओढो म्हारी भी चुनरिया, ओढो जी ओढो दादी, म्हारी भी चुनरिया ॥ राचणी मेहंदी थारे, हाथां में लगावा, गजरो बनावा थारे, जुड़े में सजावा, फूल मंगाया बढ़िया बढ़िया, ओढो म्हारी भी चुनरिया, ओढो जी ओढो दादी, म्हारी भी चुनरिया ॥ दादी जी आओ थारे, भोग लगावा, हलवा पूड़ी मेवा का, थाल सजावा, खीर बनवाई दादी केसरिया, ओढो म्हारी भी चुनरिया, ओढो जी ओढो दादी, म्हारी भी चुनरिया ॥ चुनड़ी ओढ़ाया म्हारो, मान बढ़ेगो, और भी थारो, सिणगार खिलेगो, ‘सोनू’ सरावेगी या सारी दुनिया, ओढो म्हारी भी चुनरिया, ओढो जी ओढो दादी, म्हारी भी चुनरिया ॥ ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया, शान से ल्याया थारा, टाबरिया थारा बालकिया, ओढो म्हारी भी चुनरिया, ओढो जी ओढो दादी, म्हारी भी चुनरिया ॥

रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति ... | Bhajan 176 | Ridhi Sidhi ke Data Ganapati ....

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  फ़िल्मी तर्ज - हाल क्या है दिलो का  रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति,  आपकी मेहरबानी हमें चाहिये,  पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका,  लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये,  रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति। - 2  सर झुकाता हूँ चरणों मे सुन लीजिये,  आज बिगड़ी हमारी बना लीजिये,  ना तमन्ना है धन की ना सर ताज की,  तेरे चरणों की सेवा हमें चाहिये,  रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।।  तेरी भक्ति का दील मे नशा चूर हो,  बस आँखो मे बाबा तेरा नूर हो,  कण्ठ पे शारदा माँ हमेशा रहे,  रिध्धि सिद्धि का वर ही हमें चाहिये,  रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।।  सारे देवों मे गुणवान दाता हो तुम,  सारे वेदों मे ज्ञानो के ज्ञाता हो तुम,  ज्ञान देदो भजन गीत गाते रहे,  बस यही ज़िन्दगानी हमें चाहिये,  रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।।  रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति,  आपकी मेहरबानी हमें चाहिये,  पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका,  लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये,  रिध्द...

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ | Bhajan 175 | Mere Kirtan Mein Rang Barsao ....

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  मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ || ब्रह्मा तुम भी पधारो, विष्णु तुम भी पधारो, भोले शंकर को साथ ले आओ, आओ जी गजानन आओ, मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ || लक्ष्मी तुम भी पधारो, गौरा तुम भी पधारो, सरस्वती को साथ ले आओ आओ जी गजानन आओ, मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ || राम तुम भी पधारो, लक्ष्मण तुम भी पधारो, सीता मैया को साथ ले आओ, मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ || श्याम तुम भी पधारो, राम तुम भी पधारो, राधा रानी को साथ ले आओ, मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ || हनुमत तुम भी पधारो, नारद तुम भी पधारो, मैया रानी को साथ ले आओ, मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ, आओ जी गजानन आओ ||

Maat Shri Rani Sati Ji.. | Bhajan 174 | मात श्री राणीसती जी मेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री ....

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Song Link -  मात श्री राणीसती जी मेरी, मात श्री राणीसती जी मेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री।। पाय मैं पडूँ मात थारे, क्षमा कर चूक भयी म्हारे, अनेको विघन आप टारे, काज निज भक्तन के सारे, दोऊ कर जोड़े मैं खड़ा, जननी थारे द्वार, ओ मैया जननी थारे द्वार, दुखित दीन माँ जान के मुझको, जरा दो पलक उघाड़, कृपा कर बिलखत भयी देरी, कष्ट कर दूर भक्त के री। मात श्री रानीसती जी मेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री।। कहत है सिद्धि मुनि ज्ञानी, तुम्ही जगदंबा राज रानी, मूक है कवियन की वाणी, की महिमा जात नही जानी, अखंड ज्योति प्रकाश है, व्यापक सकल जहान, ओ मैया व्यापक सकल जहान, सुंदर मंदिर रम्य शिखर, जाके ध्वजा उड़े आसमान, बजे है शंख तू रही मेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री। मात श्री रानीसती जी मेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री।। गरुड़ चढ़ कमलापति आए, सुदर्शन चक्र साथ लाए, ग्राह से गज को छुड़वाए, विमल यश तिहुँ लोक गाये, आप मात उस रीत से, सिंह सवारी साज, ओ मैया सिंह सवारी साज, आओ आतुर राखो अपने, शरण पड़े की लाज, लखुं मैं सौम्य सूरत तेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री। मात श्री रानीसती जी मेरी, कष्ट कर दूर भक्त के री।। भयानक तूफ़ा दिया घेरा...

Bhole Bhandari Ki Mahima Badi Nyaari ... | भोले भण्डारी की , महिमा बड़ी न्यारी है ... | Bhajan 173 |

   ॥ श्री शिव वन्दना॥। दोहा: अलख निरज॑न नीलकंठ, त्रिलोचन करतार, शरणों लिन्यो आपको, सदा भरो भण्डार (तर्ज : फरियाद मेरी सुनके.....) भोले भण्डारी की , महिमा बड़ी न्यारी है-२ ये भूतेश्वर बाबा, भोले त्रिपुरारी हैं || हे शिव शंकर तेरे, माथे पे चन्दा है, गले में सर्पों का हार, तेरी जट्टा में गंगा है शिव गौरी के प्यारे, नदी की सवारी है ||  भोले भण्डारी की  ... कर बैल सवारी तुम, नित धुनि रमाते हो, हे डमरू बाले तुम, क्यूँ हमें सताते हो हे भोले तेरे दर के, हम सब तो भिखारी हैं ||  भोले भण्डारी की  ... तुम बिन ना कोई मेरा, दुनियां में सहारा है, इस जीवन को हमनें, तुझ पर ही वारा है हमकों न भुला देना, हम निपट अनाड़ी हैं ||  भोले भण्डारी की  ... सबने ठुकराया है, अपनों में हूँ. बेगाना मुझको अपना लेना, सुनके मेरा अफ़शाना ये 'भक्त' कहे भोले, हम शरण तिहारी हैं ||  भोले भण्डारी की  ...

Chirmi Shiva Bhole Nath Ji | चिरमी शिव भोले नाथ जी | Bhajan 172 |

  (तर्ज ; चिरमी ) शिव कैलाशी, का है वासी, नित भाँग धतूरा खाय शिव भोले नाथ जी || माथे पे तो चंदा सोहे, और जटा में-र गंग समाय शिव भोले नाथ जी || गल सर्पों की माला लिपटे, कैसा अदूभुत-२ रूप दिखाय शिव भोले नाथ जी || ओडढ़े मृगछाला तो भोले, लेई त्रिशुल-२ हाथ उठाय 'शिव भोले नाथ जी || नन्दी की तो करे सवारी, और अंग-२ भभूति रमाय ़ शिव भोले नाथ जी || तप कैलाश पे करते भोले, जाने किसका-२ ध्यान लगाये कर शिव भोले नाथ जी || करते ताण्डव, नृत्य भोले, और डमरू-२ रहे बजाये शिव भोले नाथ जी || शिव भोले है औघड़दानी, दें दे जो भी मन मे आये शिव भोले नाथ जी || दास  “रवि" भी करता विनती, हमें देना-२ दरश दिखाय शिव भोले नाथ जी ||

Jisne Bhi Sache Man Se Shiv Bhole... | जिसने भी हे सच्चे मन से, शिव भोले | Bhajan 171 |

  ॥ श्री शिव वन्दना ॥  (तर्ज : जाने वाले एक सन्देशा... ) जिसने भी हे सच्चे मन से, शिव भोले का ध्यान किया  खुश होकर के शिव भोले ने, मन चाहा वरदान दिया ॥टेर॥  देवों में देव निराला, मेरा डमरू वाला है बातों की एक बात ये, भगतों का रखवाला हैं । | भगतों का हर काम प्रभु ने, पल में तुरन्त संवार दिया ॥1॥  खुश होकर के शिव भोले  ... देवों को अमृत मंधन में, हीरे मोती लुटा दिये,  जब विष की बारी आई तो, उसको कैंसे कौन पिये ।  नीलकण्ठ था नाम पड़ा तेरा, जब तुमने विषपान किया ॥2॥  खुश होकर के शिव भोले  ... भांग धतूरा खा कर भोला, पर्वत ऊपर वास करे, संग विराजे पारवती माँ, जो भगतों के कष्ट हरे । शिव शक्ति के सुमिरन ने, भगतों का बेड़ा पार किया ॥3॥  खुश होकर के शिव भोले  ... भोले अपने नाम को अब तो, कर साकार दिखादे तू,  हम सब है अज्ञानी वालक, ज्ञान की घूंट पिलादे तू । “भक्त मण्डल' आज प्रेम से, भोले तेरा नाम लिया ॥4॥  खुश होकर के शिव भोले  ...

Bhajan 164 | मंगल भवन, अमंगल हारी ... | Mangal Bhavan Amangal Haari ....

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  मंगल भवन, अमंगल हारी, द्रबहु सु दसरथ, अजिर बिहारी l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll हो, होइहै वही जो, राम रचि राखा, को करे तर्क, बढ़ाए साखा l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll हो, धीरज धरम, मित्र अरु नारी, आपद काल, परखिए चारी l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll हो, जेहिके जेहि पर, सत्य सनेहू, सो तेहि मिलय न, कछु सन्देहू l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll हो, जाकी रही, भावना जैसी, रघु मूरति, देखी तिन तैसी l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll हो, रघुकुल रीत, सदा चली आई, प्राण जाए पर, वचन न जाई l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll हो, हरि अनन्त, हरि कथा अनन्ता, कहहि सुनहि, बहुविधि सब संता l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll मंगल भवन, अमंगल हारी, द्रबहु सु दसरथ, अजिर बिहारी l राम सिया राम, सिया राम जय जय राम ll

Bhajan 162 | कभी दुर्गा बन के कभी काली बन के ... | Kabhi Durga Ban ke Kabhi Kaali Ban Ke ...

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कभी दुर्गा बन के कभी काली बन के चली आना मईया जी चली आना  ॥ ब्रह्मचारिणी रूप में आना ॥ भक्ति हाथ ले के, शक्ति साथ ले के  ॥ चली आना मईया जी चली आना  ॥ तुम दुर्गा रूप में आना ॥ सिंह साथ ले के, चक्क्र हाथ ले के  ॥ चली आना मईया जी चली आना  ॥ तुम काली रूप में आना ॥ खप्पर हाथ ले के, योगिन साथ ले के  ॥ चली आना मईया जी चली आना  ॥ तुम शीतला रूप में आना ॥ झाड़ू हाथ ले के, गधा साथ ले के  ॥ चली आना मईया जी चली आना  ॥ तुम गौरां रूप में आना ॥ माला हाथ ले के, गणपति साथ ले के  ॥ चली आना मईया जी चली आना  ॥ कभी दुर्गा बन के कभी काली बन के चली आना मईया जी चली आना  ॥

Bhajan 161 | श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है। Shree Radhe Govinda Mann Bhaj le Hari Ka Pyaara Naam He ...

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श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है। गोपाला हरी का प्यारा नाम है, नंदलाला हरी का प्यारा नाम है॥ मोर मुकुट सर गल बन माला, केसर तिलक लगाए, वृन्दावन में कुञ्ज गलिन में सब को नाच नचाए। श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है॥ गिरिधर नागर कहती मीरा, सूर को शयामल भाया, तुकाराम और नामदेव ने, विठ्ठल विठ्ठल गाया। श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है॥ नरसी ने खडताल बजा के, सांवरिया को रिझाया, शबरी ने अपने हाथों से, प्रभु को बेर खिलाया। श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है॥ राधा शक्ति बिना ना, कोई श्यामल दर्शन पाए, आराधन कर राधे राधे, काहना भागे आए। श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है॥ सिमरन का रस जिसको आया, वो ही जाने मन में, निराकार साकार होतरे, भगतों के आँगन में। श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है॥ श्याम सलोना कुंजबिहारी, नटवर लीलाधारी, अन्तर्वासी हरिअविनाशी, लागे शरण तिहारी। श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है॥ श्री राधे गोविंदा, मन भज ले हरी का प्यारा नाम है। गोपाला हरी का प्यारा नाम है, नंदलाला हरी का प्या...

Bhajan - 160 | राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई .. | Ram Naam Sukh Daayi..

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राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ ये तन है जंगल की लकड़ी, ये तन है जंगल की लकड़ी आग लगे जल जाए, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ ये तन है कागज की पूडिया, ये तन है कागज की पुडिया हवा चले उड़ जाई, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ ये तन है माटी का ढेला, ये तन है माटी का ढेला बूँद पड़े गल जाई, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ ये तन है फूलो का बगीचा, ये तन है फूलो का बगीचा धूप पड़े मुरझाई, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ ये तन है कच्ची है हवेली, ये तन है कच्ची है हवेली पल मे टूट जाई, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ ये तन है सपनो की माया, ये तन है सपनो की माया आँख खुले कुछ नाही, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥ राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई ये जीवन दो दिन का ॥ राम नाम सुखदाई...॥

राधिका गोरी से बिरज की छोरी से | Bhajan 159 | Radhika Gori Se Biraj Ki Chori Se ...

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राधिका गोरी से बिरज की छोरी से, ॥ राधिका गोरी से बिरज की छोरी से...॥ मैया करादे मेरो ब्याह ... उम्र तेरी छोटी है, नज़र तेरी खोटी है, कैसे करादू तेरो ब्याह ... .॥ जो नहीं ब्याह कराये, तेरी गैया नहीं चराऊ आज के बाद मेरी मैया तेरी देहली पर न आऊँ आएगा रे मज़्ज़ा रे मज़्ज़ा अब जीत हार का ॥ राधिका गोरी से बिरज की छोरी से...॥ चन्दन की चौकी पर मैया तुझको बिठाऊँ अपनी राधा से मैं चरण तेरे दबवाऊं भोजन मैं बनवाऊंगा बनवाऊंगा, छप्पन प्रकार के ॥ राधिका गोरी से बिरज की छोरी से...॥ छोटी सी दुल्हनिया जब अंगना में डोलेगी तेरे सामने मैया वो घूँघट न खोलेगी दाऊ से जा कहो जा कहो बैठेंगे द्वार पे ॥ राधिका गोरी से बिरज की छोरी से...॥ सुन बातें कान्हा की मैया बैठी मुस्काएं लेके बलैयां मैया हिवडे से अपने लगाये नज़र कहीं लग जाये न लग जाये न मेरे लाल को ॥ राधिका गोरी से बिरज की छोरी से...॥ राधिका गोरी से बिराज की छोरी से कान्हा कारादू तेरो बियाह ...........