बालासा कारज सारया रे .... | Bhajan - 58 | Shri Bajrangi Hanuman Bhajan | Balasa Kaaraj Saryaa Re Raja Ram Ka ...

(तर्ज : मोरिया आछो बोल्यो रे ...)

 

अस्थाई

बालासा, कारज सारया रे, राजा राम का।

लायो-ल्यायो रे संजीवन बूटी जाय बालासा ॥ टेर।।

 

अन्तरा

बालासा, शक्ति चलायी इन्द्रजीत ने, जीत ने, जीत ने ।

लागी-लागी रे-2, लखनजी ने जाय, बालासा कारज...॥१॥

 

बालासा, दुखड़ो हुयो रे राजा राम ने, राम ने, राम ने।

बाने कुण बंधावे-2, अब जाय धीर, बालासा कारज...॥२॥

 

बालासा, बिड़लो उठा कर आप चालिया, चालिया, चालिया।

हेरी हेरी रे – 2, संजीवन बूटी जाय, बालासा कारज...॥३॥

 

बालासा, पर्वत उठाकर आप चालिया, चालिया, चालिया।

मारयो-मारयो रे – 2,  भरतजी थारे बाण, बालासा कारज...॥४॥

 

बालासा, भरतजी पूछी सारी वारता, वारता, वारता।

आप दिन्ही है -2,  सारी समझाय, बालासा कारज...॥५॥

 

बालासा, संजीवन बूटी दीन्ही ल्याय के, ल्याय के, ल्याय के।

उठ कर गले से – 1, मिल्या है दोन भ्रातबालासा कारज...॥६॥

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