हरे राम हरे रामा .... | Bhajan - 53 | Shri Hanuman Bajrangi Bhajan | Hare Rama Hare Rama ...
(तर्ज- बचपन की मोहब्बत को)
अस्थाई
हरे राम हरे रामा, जपते थे हनुमाना ।।
इस मंत्र की महिमा को, सारे जग ने है जाना ॥
टेर ॥
अन्तरा
इस मंत्र से हनुमत ने, सागर को पार किया।
उस राजा रावण की, लंका को जार दिया ॥१॥
जब भक्त विभूषण ने, इस मंत्र का जाप किया।
श्रीराम के प्यारे बने, लंका पे राज किया ॥२॥
इस मंत्र की महिमा को, भिलनी ने जान लिया।
रघुबर खुद घर आये, कितना सम्मान दिया ॥३॥
इस मंत्र से हार गया, रावण सा बलशाली ।
इस मंत्र से तुलसी ने रामायण लिख डाली॥४॥
जब केवट ने मुख से, इस मंत्र के बोल पड़े।
'बनवारी' खुद रघुवर, केवट की नाव चढ़े ॥५॥
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