भोला बाबा जी थानै अरज ...| Bhajan - 55 | Shri Shiv Bhole Bhajan | Bhola Baba Ji Thane Araj Sunawa ...

(तर्ज – पीलो)

अस्थाई

भोला बाबा जी थानै अरज सुणावां जी,

तो चरणों की धूल थारी माथै मांय लगावाँ जी ।। अरज ।।

अन्तरा

थारो सो ओघड़दानी, दूजो ना कोई जी,

तो पलक उघाड़ो दाता, थारा गुण गावाँ जी ॥

अरज सुणावाँ जी॥१॥

 

ऑक धतूरा खावो, बिजिया की घुंटी जी,

तो नित प्रति शंकर जी की, हाजरी बजावाँ जी।

अरज सुणावाँ जी॥२॥

 

गंगा जटा में थारे, मस्तक पर चन्दा जी,

तो अंग विभूति थां पै, बलि बलि जावाँ जी।

अरज सुणावाँ जी ॥३॥

 

श्याम बहादुर थारे, चरणां को चेरो जी,

तो भक्त मण्डल में आवो 'शिव' प्रेम सँ बुलावाँ जी॥

अरज सुणावाँ जी ॥४॥

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