तू ने हीरो सो जनम गँवायो ... | Bhajan - 100 | Shri Kaya Bhajan - Bhajan Ka Mahatva | Tune Hiro So Janam Gawayo ...
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दोहा
रात गँवायो सोय कर, दिवस गँवायो खाय ।
हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय ।।
तू ने हीरो सो जनम गँवायो,
भजन बिन बावरे ।।टेर।।
कदे न तू सतसंगत कीन्ही,
कदे न हरि गुण गायो ।
पचि - पचि मरियो बैल की नाही,
सोय रहयो उठ खायो ||१||
तू ने हीरो सो जनम गँवायो,
भजन बिन बावरे ।।टेर।।
यो संसार हाट बनिये की,
जग सौदा ले आयो ।
चतुर माल तो दूनो कीन्हो,
मूरख मूल गँवायो ।।२।।
तू ने हीरो सो जनम गँवायो,
भजन बिन बावरे ।।टेर।।
यो संसार फूल सेमर को,
सूबो देख लुभायो ।
मारी चोंच निकल गई रूई,
सिर धुनि धुनि पछितायो ||३||
तू ने हीरो सो जनम गँवायो,
भजन बिन बावरे ।।टेर।।
यो संसार माया को लोभी,
ममता महल चिनायो ।
कहत “कबीर' सुनो भई साधो,
हाथ कछु नहीं आयो ।।४।।
तू ने हीरो सो जनम गँवायो,
भजन बिन बावरे ।।टेर।।
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