जगदम्बा थे तो, आकर ओढो ऐ ... | Bhajan - 44 | Shri Rani Sati Dadi Maa Bhajan | Jagdamba The To Aakar Odho Ae ...
(तर्ज : मारवाड़ी)
जगदम्बा थे तो, आकर ओढो ऐ,
सेवक ल्याया माँ थारी चुनड़ी ।। टेर।।
अन्तरा
सुहागन मिल, चाव से बांधी ऐ,
श्रद्धा के रंग में, रंगाई चुनड़ी ।।१।।
सुरता रो झीणो, पोत बनायो ऐ,
मनड़ा की पेटी में, या आई चुनड़ी।।२।।
आशा का तारा, खूब लगाया ऐ,
मोती की लूमा, लगाई चुनड़ी।।३।।
माँ सच्चा तारा, साचो ही गोटो ऐ,
म्हानै प्यारी लागै माँ, तारा री चुनड़ी।।४।।
चुनड़ी का तारा, चम-चम चमके ऐ,
म्हारो मनड़ो हर लिन्यो, तारा री चुनड़ी।।५।।
'बनवारी' गावे, चुनड़ उढ़ावे ऐ,
थे आकर ओढ़ो माँ, तारा री चुनड़ी ।।६।। जगदम्बा थे तो ...
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