भगतां की भीड़ अपार ....| Bhajan - 59 | Shri Bajrangi Hanuman Bhajan | Bhakta Ki Bheed Apaar ...
(तर्ज: होलियाँ मे उड़े रे
गुलाल.....)
भगतां की भीड़ अपार, बालाजी थारे कीर्तन मं
छाई है अजब बहार, बालाजी थारे कीर्तन
मं।।
अन्तरा
रंग बिरंगा फूलड़ा ल्याया, सोणा-सोणा हार बनाया
खूब सजाया सिणगार, बालाजी थारे कीर्तन मं।। भगतां की भीड़ अपार ...
सगला मिलकर भजन गावै, खुद भी नाचे सबने नचावे
ताली बजाये नर-नार, बालाजी थारे कीर्तन
मं।।
जो भी थारे कीर्तन में आवे, वो ही मुरादा मन की
पावे
म्हें भी देख्या हाँ चमत्कार, बालाजी थारे कीर्तन
मं।।
घड़ी-२ म्हाने परचा मिले है, 'रवि' कहे म्हारो जीवन खिले
है
सुपणा होवे है साकार, बालाजी थारे कीर्तन मं।।
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