मेहन्दी रची थारे हाथों में ... | Bhajan - 39 | Shri Rani Sati Dadi Maa Bhajan | Mehendi Rachi Thare Haatho Me ....

मेहन्दी रची थारे हाथों में, घुल रह्यो काजल आंख्यां में।

चुनड़ी को रंग सुरंग, माँ राणी सती, माँ राणी सती ।

फूल खिल्या जिण बागा में, चांद उगो माँ रातों में।

थारो किसो सुहानो रूप, माँ राणी सती - माँ राणी सती।

मेंहदी रची....


रूप सुहानो जद से देख्यो, नींदडली नहीं आँख्या में।

म्हारे मन पर जादू कर गयो, थारी मीठी बातां ।

भूल गई सब कामा ने, याद करूं थारं नामां ने।

थारी इसो सुहानो रूप, मां राणी सती - मां राणी सती।

मेहन्दी रची...


थे कहो तो दादी थारो, नथली बन जाऊँ मैं।

नथली बन जाऊँ यार, होठां से लग जाऊँ मैं।

चुड़लो बनू थार हाथों में, बोर बनू, थारे माथे में।

बन जाऊँ बाजूचन्द माँ राणी सती - माँ राणी सती।

मेंहन्दी रची.......


थे कहो तो दादी थारी, पायलड़ी बन जाऊँ मैं।

पायलड़ी बन जाऊं थारे, चरणां सूं लग जाऊँ मैं।

हार बनू पार गले में, मोती बनू थारै झुमके में।

नेणा में करल्यूं बन्द, मां राणी सती - माँ राणी सती।

मेंहन्दी रची......

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