जगदम्बे भवानी मैया ....| Bhajan - 71 | Shri Devi Maa Bhajan | Jagdambe Bhavani Maiya ...

जगदम्बे भवानी मैया! तेरा त्रिभुवन में छाया राज है।

सोहे वेष कसुमल नीको, तेरे रत्नों का सिर पै ताज है ।।टेर।।

 

अन्तरा

जब जब भीड़ पड़ी भक्तन पर, तब-तब आय सहाय करे।

अधम उद्धारण तारण मैया, युग-युग रूप अनेक धरे।।

सिद्ध करती तूं भक्तों के काज है, नाम तेरो गरीब नवाज है।।

सोहे वेष कसुमल... ||||

 

जल पर थल और थल पर सृष्टि, अदभुत थारी माया है।

सुर नर मुनिजन ध्यान धरे नित, पार नहीं कोई पाया है।

थारे हाथों में सेवक की लाज है, लियो शरणों तिहारो मैया आज है।।।

सोहे वेष कसुमल...||||

 

जरा सामने तो आओ मैया, छुप-छुप छलने में क्या राज है।

यूं छुप ना सकोगी मेरी मैया, मेरी आत्मा की ये आवाज है।।

 

मैं तुझको बुलाऊँ, तुम नहीं आओ, ऐसा कभी ना हो सकता।

बालक अपनी, मैया से बिछुड़कर, सुख से कभी ना सो सकता।।

 

मेरी नईया पड़ी मझधार है, अब तूं ही तो खेवनहार है।

यूछुप ना सकोगी मेरी मैया, मेरी आत्मा की ये आवाज है।।

जगदम्बे भवानी मैया ...।।


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