म्हारै जद भी, मुसीबत कोई आवण लागै .....| Bhajan - 45 | Shri Rani Sati Dadi Maa Bhajan | Mhare Jad Bhi Mushibat Koi Aawan Lage ...

म्हारै जद भी, मुसीबत कोई आवण लागै,

कोई आवण लागै …..

म्हारे सर के ऊपर चूनड़ी, लहरावण लागै-२ 

 

जब-जब म्हारी जीवन नैया, डगमग डोले-२

पल म म्हारी दादी हाथ हिलावै, होले-होले-२

अपने आप ही भंवर में ... हो-हो ... अपने आप ही

भंवर म नैया चालण लागै-२।। म्हारे सर के ऊपर चूनड़ी...

 

जब भी दादीजी म्हारो मनड़ो यो घबरावै-२

पलभर भी ना देर करे माँ दौड़ी-दौड़ी आवै-२

हाथो-हाथ बेटो यो .... हो-हो .... हाथों हाथ

बेटो यो मुसकावण लागै -२ ।  म्हारे सर के ऊपर चूनड़ी...

 

म्हारी कुलदेवी दादीजी जब जब म्हासु रूठे-२

तब 'बनवारी' दादीजी न, और नहीं कुछ सूझे

थारा बेटा थाने चुनड़ी ... हो, हो .... थारा बेटा थाने चुनड़ी

उढावण लागै, माँ उढावण लागै,

हाथों हाथ ही या मैया, मुसकावण लागै-२ ।  म्हारे सर के ऊपर चूनड़ी...

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