लिखता हूँ खत में तुझे ....हे दादी सम्भालो आकर ... | Bhajan - 19 | Shri Rani Sati Dadi Maa Bhajan | Likhta Hun Khat Me Tujhe Apne Dil Ki Baat ...

(तर्ज : देना हो तो दीजिये...)

लिखता हूँ खत में तुझे, अपने दिल की बात,

हे दादी सम्भालो आकर, है लाज तुम्हारे हाथ ।। टेर।।

 

शरणागत की बात दादी, तुम्हें निभानी आती है,

इसी भरोसे मैने लिख दी, मनुहार भरी ये पाती है,

इस चिट्ठी में पढ़ लेना, मेरे हृदय के जज्बात।।१।। हे दादी सम्भालो  ...

 

सारे जग की आश छोड़कर, जिसने तुझे बुलाया है,

आकर काज संवारे तूने, उसका मान बढ़ाया है,

भगतों ने चिट्ठी भेजी,थे रखलो उनकी लाज ।।२।। हे दादी सम्भालो  ...

 

भगतों जैसे भाव नहीं है, फिर भी है विश्वास तेरा,

जीवन के हर मोड़ पे, मुझको होता है आभास तेरा,

है दारम दार तुम्हीं पे, दादी मेरी क्या औकात ।।३।। हे दादी सम्भालो  ...

 

मेरे घर की मालिक तुम हो, तुम्हें निमंत्रण क्या दूं मैं,

एक सहारा तेरा मुझको, इतना याद दिला दूं मैं,

तेरी बाट निहारे ‘बच्चे', ले अंसूवन की सौगात ।।४।। हे दादी सम्भालो  ...


Comments

Popular posts from this blog