शेरावाली मैया तेरी महिमा अपार है.... | Bhajan - 47 | Shri Devi Mata Bhajan | Sherawali Maiya Teri Mahima Apaar He

(तर्ज: नैन खोल देख मैया....)

शेरावाली मैया तेरी महिमा अपार है।

तेरी जय-जयकार मैया, तेरी जय-जयकार है।।

 

सिंह की सवारी तेरा, रुप निराला है,

हाथ में त्रिशूल सोहे, गले मुण्डमाला है।

मुखड़े से उमड़े, तेज बेशुमार है। तेरी जय जय…….

 

तू ही नवदुर्गा है, तू ही माँ काली है,

दर से तेरे कोई, गया नहीं खाली है।

अपने भक्तों से करती, सदा से ही प्यार है। तेरी जय जय…….

 

कितनों ही पापियों को, तूने माँ तारा है,

लेके अवतार, असुरों को संहारा है।

तेरी शक्ति को कोई, पायो नहीं पार है। तेरी जय जय…….

 

पाण्डवो की तुमने ही, लाज बचाई थी,

कौरवो के रक्त से, प्यास बुझाई थी।

तेरे दर्शन खातिर, भक्त बेकरार है। तेरी जय जय…….

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