आ लौट के आजा हनुमान .... | Bhajan - 54 | Shri Bajrangi Hanuman Bhajan | Aa Lot Ke Aaja Hanuman ...
(तर्ज- आ लौट के आजा मेरे मीत...)
अस्थाई
आ लौट के आजा हनुमान, तुम्हें भगवान बुलाते
हैं ।
बचाले लक्ष्मण के तू प्राण, तुझे भगवान बुलाते हैं
।
अन्तरा
गये पवनसुत लाने सजीवन, अब तक क्यों नहीं आये।
सेनापति सुग्रीव पुकारे, नर बानर कुम्हलाये ।
सब लोग भये अज्ञान, तुम्हें भगवान बुलाते
हैं ।
बचाले लक्ष्मण के...॥१॥
कभी तड़पते, कभी बिलखते, भर भर नैन प्रभ रोते।
हाय लखन अपनी माता के, पुत्र तो थे इकलौते ।
प्रभु रुदन करें महान, तुम्हें भगवान बुलाते
हैं ।
बचाले लक्ष्मण के... ॥२॥
बीत गई सब रैन, रही न और एक पल बाकी ।
देख देख के राह तुम्हारी, बैरण अँखियां थाकी ।
कहीं उदय न हो जाय भान, तुम्हें भगवान बुलाते
हैं ।।
बचाले लक्ष्मण के... ॥३॥
प्रात समय हनुमान संजीवन, ले सेना बीच आये ।
'गंगाराम' धन्य बजरंगी, लक्ष्मण के प्राण
बचाये ।
अब जाग उठे बलवान, तुम्हें भगवान बुलाते
हैं ।।
बचाले लक्ष्मण के... ॥४॥
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