गजानन्द सरकार पधारो ... | Bhajan - 2 | Ganesh Vandana | Gajanand Sarkar Padharo ...
(तर्ज : फूल तुम्हें भेजा है.....)
गजानन्द सरकार पधारो, कीर्तन की सब त्यारी
है,
आओ आओ, बेगा आओ, चाव दरश को भारी है
गजानन्द.... ।।१।।
थे आओ जद, काम बणेला, थां पर सारी बाजी है,
रणत भवनगढ़ वाला सुणल्यो, चिन्ता म्हारै लागी है,
देर करो मत, ना तरसाओ, चरणां अरज हमारी है।
गजानन्द.... ।।२।।
रिद्धि-सिद्धि संग ले आओ विनायक,
दो दर्शन थारे भगतां न,
भोग लगावां, धोक लगावां, पुष्प चढावां थारे चरणां म,
गजानन्द, थारै हाथां म, अब तो लाज हमारी है।।
गजानन्द.... ।।३।।
‘भक्त मंडल’ की, विनती सुणकर, शिव सुत प्यारो आयो है,
जय जयकार, करो गणपति की, आकर मन हरषायो हैं,
बरसै लो रस अब भजनां मे, थारी महिमा न्यारी
है।
गजानन्द.... ।।४।।
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