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धन जोबन और काया नगर की, कोई मत करो रे मरोर || Bhajan 130 | Dhan Joban Aur Kaya Nagar Ki....

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धन जोबन और काया नगर की,  कोई मत करो रे मरोर॥ क्यूँ चले से आंगा पांगा, चिता बिच तने धर देंगे नंगा, एक अग्नि का लेके पतंगा, तेरे फिर जाएंगे चारो ओर, ॥ धन जोबन और काया...॥ सिराणे खड़ी तेरी माई रोवे, भुजा पकड़ तेरा भाई रोवे, पायाँ खड़ी रे तेरी ब्याहि रे रोवे, जिसने ल्याया बाँध के मोल, ॥ धन जोबन और काया...॥ पांच साथ तेरे चलेंगे साथ में, गोसा पुला लेके हाथ में, इक पिंजरी का ले बांस हाथ में , तेरे देंगे सर में फोड़, ॥ धन जोबन और काया...॥ शंकर दास ब्राम्हण गावे, सब गुणियों को शीश झुकावे, अपणा गाम जो खोली बतावे, वो तो गया रे मुलाजा तोड़, धन जोबन और काया नगर की, कोई मत करो रे मरोर॥

जिसके जीवन मैं, मिला सत्संग हैं | Bhajan 117 | Jisko Jeevan Main Mila Satsang Hai

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जिसके जीवन मैं, मिला सत्संग हैं, उसे हर घड़ी, आनंद ही आनंद है। जिसे जीवन मैं मिला सत्संग हैं, उसे हरदम आनंद ही आनंद है। - x2 जिसका हरी से, जुड़ा संबंध हैं, उसे हर घड़ी आनंद ही आनंद है। - x4 सूरदास मीरा कबीरा ने गया, तुलसी नानक ने भी दर्शन पाया। - x2 जिसके हृदय मे राम नाम बंद है, जिसके हृदय मे राम नाम बंद है, उसे हर घड़ी आनंद ही आनंद है। - x2 जिसके जीवन मैं मिला सत्संग हैं, उसे हर घड़ी आनंद ही आनंद है। जिसका जीवन सच्चाई में ढल गया, उसके पापों का पर्वत भी ढल गया, उसके रोम रोम मे बस गोविंद  है। संत और ऋषियो की वाणी को मानो, तत्व क्या है जगत का ये मन मे पहचानो। जिसका चौरासी कट जाए फंद है उसे हर घड़ी आनंद ही आनंद है। जिसे जीवन मैं मिला सत्संग हैं, उसे हरदम आनंद ही आनंद है। - x2 स्वर्ग जाने की इच्छा नहीं है  । मुक्ति पाने की इच्छा नहीं है  । उसे ही मिलता यहाँ परमानंद है  । उसे हर घड़ी आनंद ही आनंद है। जिसे जीवन मैं मिला सत्संग हैं, उसे हरदम आनंद ही आनंद है। - x2

नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण .. | Bhajan - 105 | Tulsi Vani - Sundar Kaya Bhajan | Nar Main Hai Narayan Bande ...

|| नर में है नारायण बन्दे || दोहा  तुलसी या संसार में, मिलिये सबसे धाय । ना जाने किस रूप में, नारायण मिल जाय ।। काशी घूम ले मथुरा घूम ले, घूम ले चाहे वन वन । नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।। बोलो जय नारायण, बोलो जय नारायण ।। ओ बोलो जय नारायण, बोलो जय नारायण ।। पहन के भगवा, तिलक लगाके, बने तू संत ज्ञानी । हो गया मस्त मलंग न पीड़ा किसी की तूने जानी - २ | विभूति कमण्डल, गले में माला, व्यर्थ है माथे चन्दन । नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।। दया धर्म चाहे दान करो, ये किसी काम नहीं आते । दीन दुखी निर्धन को जब तक, गले नहीं लगाते - २ । पर मेरा नारायण होता है, इसी बात में प्रसन्न । नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।। ईश्वर के हैं बन्दे सबको रूप उसी का मानो । ना कोई ऊँचा ना कोई नीचा, सबको एक ही जानो - २ । सबसे उत्तम पूजा यही है, सबसे बड़ा ये धन । नर में है नारायण बन्दे, नर में है नारायण ।। ओ बोलो जय नारायण, बोलो जय नारायण ।।

हरि का नाम सुमर नर प्यारे, कभी भुलाना ना चाहिये | Bhajan - 104 | Sundar Atma Kaya Bhajan | Hari Ka Naam Sumar Nar Pyare....

|| क्या नहीं करना चाहिये || हरि का नाम सुमर नर प्यारे, कभी भुलाना ना चाहिये । पाकर मानुष तन दुनिया में, मुफ्त गंवाना ना चाहिये ।।टेर।। झूठ कपट और पाप कर्म से, धन को कमाना ना चाहिये । पुण्य पुर्बले से आता हो, तो ठुकराना ना चाहिये ।।१।। पर नारी से कभी भुलाकर, प्रीत लगाना ना चाहिये । दुर्जन नर को अपने पास में, कभी बैठाना ना चाहिये ।।२।। देकर के विश्वास किसी को, फिर हट जाना ना चाहिये । सच्चे मित्र से मन की कोई, बात छिपाना ना चाहिये ।।३।। अपने घर का भेद कभी, दुश्मन को बताना ना चाहिये । आमद से पैसे का ज्यादा, खर्च बढ़ाना ना चाहिये ।।४।। नये नये पंथों की बातों में, फँस जाना ना चाहिये । अपना पुरूषार्थ करने में, दिल शरमाना ना चाहिये ।।५।। पुण्य कर्म करके पीछे, मन में पछताना ना चाहिये । पाप कर्म की तरफ कभी, मन को ललचाना ना चाहिये ।।६।। जहाँ न आदर होय कभी, उस घर में जाना ना चाहिये । अपने घर में आवे उसके, दिल को दुखाना ना चाहिये ।।७।। बिन मालिक के हुकुम किसी, वस्तु को उठाना ना चाहिये । घर के झगड़े के कारण, राज सभा में जाना ना चाहिये ।।८।। कर सत्संग विचार सदा, दिल से विसराना ना चाहिये । ब्रह्मानन्द...

बेटी ले के आसी जी,अपनो भाग ... | Bhajan - 103 | Sundar Marwadi Beti Pe Bhajan - Save Girl Child | Beti Le Ke Aasi Ji Apno Bhaag ...

बेटी ले के आसी जी,अपनो भाग, क्यूँ मारो इन्हे  कोख में ।। बड़भागी वे मात पिता जो, करे है कन्यादान, ई के बराबर पुण्य ना कोई, बोले बेद पुरान, कन्या बध से ,बड़ो ना कोई पाप, क्यूँ मारो इन्हे  कोख में ।। काइयाँ तूने  नौ नौ कन्या, पूजा नवरता मे फिर भी अपनी बेटी ने मारा, अपने ही हाथां से  काइयाँ दुर्गा, निभासी तेरो साथ, क्यूँ मारो इन्हे  कोख में  ।। माँ की एक ही कोख से, बेटा बेटी जनम लेवे  है  एक बराबर दुध बिधाता, आँचल में देवे है। ये भी मत ना, करोजी दू भाग, क्यूँ मारो इन्हे  कोख में  ।। भक्त कवे जी कहग्या म्हारे, दादा दादी मानी बेटी की माँ राज करे हे, भरे बुढापो  पानी बेटी दो दो कुल की, है राखे लाज,  क्यूँ मारो इन्हे  कोख में  ।।

भाई रे मत दीज्यो, मावड़ली न दोष करमां री रेखा.. | Bhajan - 102 | Sundar Marwadi Kaya Bhajan | Bhai Re Mat Dijyo Mawadli Ne Dosh Karma Ri Rekha...

॥करमारी करणी न्यारी न्यारी।। भाई रे मत दीज्यो, मावड़ली न दोष, करमां री रेखा, न्यारी रे न्यारी।।टेर।। भाई रे एक मावड़ली रे बेटा च्यार, च्यारां की करणी न्यारी रे न्यारी। भाई रे पेलोड़ो हीरा को व्योपार, दूजोड़ो कपड़ा बेच रह्यो, भाई रे तीजोड़ो खेतों में किसान, चौथोड़ो भिक्षा मांग रह्यो।। भाईरे मत दीज्यो.... ।। १।।  भाई रे एक गाय रे बछड़ा च्यार, च्यारां की करणी न्यारी रे न्यारी। भाई रे पेलोड़ो सुरज जी को सांड, दूजोड़ो शिव रो नांदिया, भाईरे तीजोड़ो चोपा माँही बैल, चौथोड़ी घाणी पीस रह्यो।। भाईरे मत दीज्यो.... ।। २ ।। भाई रे एक माटी रा कलसा च्यार, च्यारां की करणी न्यारी रे न्यारी। भाई रे पैलोड़ो पूजा रो कलश, दूजोड़ो चवरयाँ मांड रहो, भाई रे तीजोड़ो पणिहारी रे शीश, चौथोड़ो मरघट जाय रह्यो।। भाईरे मत दीज्यो....  ।। ३ ।। भाई रे एक बेलड़ रे फुलड़ा च्यार, च्यारां की करणी न्यारी रे न्यारी। भाई रे पेलोड़ो चढ़े मन्दिर माय, दूजोड़ो गजरा पोवतो, भाई रे तीजोड़ो पंख पखेरू खाय, चौथड़ो मुर्दा ऊपर पड़यो।। भाईरे मत दीज्यो....  ।। ४।।

तू ने हीरो सो जनम गँवायो ... | Bhajan - 100 | Shri Kaya Bhajan - Bhajan Ka Mahatva | Tune Hiro So Janam Gawayo ...

For Audio Click Here :  Tu Ne Heero So Janam Gawayo दोहा रात गँवायो सोय कर, दिवस गँवायो खाय । हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय ।। तू ने हीरो सो जनम गँवायो,  भजन बिन बावरे ।।टेर।। कदे न तू सतसंगत कीन्ही,  कदे न हरि गुण गायो । पचि - पचि मरियो बैल की नाही,  सोय रहयो उठ खायो ||१|| तू ने हीरो सो जनम गँवायो,  भजन बिन बावरे ।।टेर।। यो संसार हाट बनिये की,  जग सौदा ले आयो । चतुर माल तो दूनो कीन्हो,  मूरख मूल गँवायो ।।२।। तू ने हीरो सो जनम गँवायो,  भजन बिन बावरे ।।टेर।। यो संसार फूल सेमर को,  सूबो देख लुभायो । मारी चोंच निकल गई रूई,  सिर धुनि धुनि पछितायो ||३|| तू ने हीरो सो जनम गँवायो,  भजन बिन बावरे ।।टेर।। यो संसार माया को लोभी,  ममता महल चिनायो । कहत “कबीर' सुनो भई साधो,  हाथ कछु नहीं आयो ।।४।। तू ने हीरो सो जनम गँवायो,  भजन बिन बावरे ।।टेर।।

मुक्ति भजन (अंतिम इच्छा) - इतना तो करना स्वामी .....| Bhajan - 97 | Shri Krishna Sanwara Bhajan | Itna To Karna Swami Jab Praan Tan Se Nikle ...

For Audio Click Here :  Itna To Karna Swami Jab Praan दोहा : कागा सब तन खाइयो , चुन चुन खाइयो माँस । दो नैना मत खाइयो , प्रभु मिलन की आस ।।   इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले। गोविन्द नाम लेकर , फिर प्राण तन से निकले ।।१ ।। श्रीगंगा जी का तट हो , यमुना का बंशी-बट हो । मेरा सांवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ।।२ ।। श्रीवृन्दावन का स्थल हो , मेरे मुख में तुलसी दल हो । विष्णु-चरण का जल हो ,  जब प्राण तन से निकले  ।।३ ।। सन्मुख सांवरा खड़ा हो , मुरली का स्वर भरा हो । तिरछा चरण धरा हो ,  जब प्राण तन से निकले  ।।४ ।। सिर सोहना मुकुट हो , मुखड़े पै काली लट हो । यही ध्यान मेरे घट हो ,  जब प्राण तन से निकले  ।।५ ।। केसर तिलक हो आला , मुख चन्द्र सा उजाला । डालूँ गले में माला ,  जब प्राण तन से निकले  ।।६।। कानों जड़ाऊँ बाली , लटकी लटें हौ काली । देखू छटा निराली ,  जब प्राण तन से निकले  ।।७।। पीताम्बरी कसी हो , होठों पै कुछ हँसी हो। छवि यह ही मन बसी हो ,  जब प्राण तन से निकले ...