जय जय पितरजी महाराज ... | Bhajan - 7 | Pitar Ji Vandana || श्री पित्तरेश्वर वन्दना || Jai Jai Pitarji Ji Maharaj ...
अस्थाई
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड्यो हूँ
थारी।। टेर
अन्तरा
आप ही रक्षक, आप ही दाता, आप ही खेवन हारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहीं जानूँ, आप ही हो रखवारे ।।१।।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रख वारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये थारी फुल वारी ।।२।।
देश और परदेस सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुख दाई ।।३।।
मैं भी आयो शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार ।।४।।
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