रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम ....| Bhajan - 89 | Shri Sita Ram Bhajan | Raghupati Raghav Rajaram ....

रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम !

सीताराम सीताराम, भज मन प्यारे सीता राम ॥१॥


भीड़ पड़ी भक्तों ने पुकारा, कष्ट हरो प्रभु आप हमारा ।

तब दशरथ घर प्रगटे राम, पतित पावन सीताराम ॥२॥


बालक बन में ताड़का मारी, गौतम नारी अहिल्या तारी ।

सब ऋषियों के पूरण काम, पतित पावन सीताराम ॥३॥


जनकपुरी में शिव-धनु तोरी, सीताराम विवाह भयोरी ।

कैसी सुन्दर जोड़ी राम, पतित पावन सीताराम ॥४॥


राज तिलक की देख तैयारी, कैकेयी ने तब बात बिगाड़ी।

चौदह वर्ष गये वन में राम, पतित पावन सीताराम ॥५॥


पंचवटी में गये रघुराई, सूर्पनखा की नाक कटाई ।

खरदूषण को मारे राम, पतित पावन सीताराम ॥६॥


गिद्ध जटायु स्वर्ग पठायो, मित्र राज सुग्रीव बनायो

सीता सुधि लाये हनुमान, पतित पावन सीताराम ॥७॥


माया मृग मारीच बनायो, योगी बन सीता हर ल्यायो ।

बन-बन सीता ढूंढे राम, पतित पावन सीताराम ॥८॥


लंकापति रावण को मारा, राज विभीषण को दे डारा ।

सीता घर ले आये राम, पतित पावन सीताराम ॥९॥


मात कौशल्या आरती उतारे, सब मिलकर जय जयकार पुकारे ।

राज तिलक पाये श्री राम, पतित पावन सीताराम ॥१०॥


पार्वती ने शिव से पूछा, कौन बड़ा है जग में ऊँचा ।

बोले शंकर कहो श्रीराम, पतित पावन सीताराम ॥११॥

Comments

Popular posts from this blog