श्री वृन्दावन-धाम अपार रटे जा राधे-राधे ... | Bhajan - 92 | Shri Radhe Rani Madhur Kirtan | Shri Vrindavan Dham Apar Ratte Ja Radhe Radhe ...

श्री वृन्दावन-धाम अपार रटे जा राधे-राधे।

भजे जा राधे-राधे! कहे जा राधे-राधे॥१॥

वृन्दावन गलियाँ डोले, श्रीराधे-राधे बोले।

वाको जनम सफल हो जाय, रटे जा राधे-राधे॥२॥

या ब्रज की रज सुन्दर है, देवनको भी दुर्लभ है।

मुक्ता रज शीश चढ़ायरटे जा राधे-राधे॥३॥

ये वृन्दावन की लीला, नहीं जाने गुरु या चेला।

ऋषि-मुनि गये सब हाररटे जा राधे-राधे॥४॥

वृन्दावन रास रचायो, शिव गोपी रुप बनायो।

सब देवन करें विचाररटे जा राधे-राधे॥५॥

जो राधे-राधे रटतो, दुःख जनम-जनम को कटतो।

तेरो बेड़ो होतो पाररटे जा राधे-राधे॥६॥

जो राधे-राधे गावे, सो प्रेम पदारथ पावे।

भव-सागर होवें पररटे जा राधे-राधे॥७॥

जो राधा नाम न गयो, सो विरथा जन्म गँवायो।

वाको जीवन है धिक्काररटे जा राधे-राधे॥८॥

जो राधा-जन्म न होतो, रसराज विचारो रोतो।

होतो न कृष्ण अवताररटे जा राधे-राधे॥९॥

मंदिर की शोभा न्यारी, यामें राजत राजदुलारी।

डयौढ़ी पर ब्रह्मा राजेरटे जा राधे-राधे॥१०॥

जेहि वेद पुराण बखाने, निगमागम पार न पाने।

खड़े वे राधे के दरबाररटे जा राधे-राधे॥११॥

तू माया देख भुलाया, वृथा ही जनम गँवाया।

फिर भटकैगो संसाररटे जा राधे-राधे।॥१२॥

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