चालो ऐ सखियाँ चालो ...| Bhajan - 78 | Shri Shiv Bhole Bhajan | Chalo Ae Sakhiyan Chalo ...
(तर्ज- मारवाड़ी तोरन)
अस्थाई
चालो ऐ सखियाँ चालो, हिमाचल के द्वारे राज
।
गोरां बाई को बीन्द निरखस्याँ, गोरो है या कालो राज ॥
ऐसा कामण म्हारै, शिव भोले न सोहैं राज ॥ चालो ..
बाघम्बर का वस्त्र पहरे, अंग विभूति रमावै राज
।
मस्तक पर तो चन्द्रमा सोहे, जटा में गंग विराजे
राज ॥
काना में थारे कुण्डल सोहे, गल सर्पो की माला राज
।
नन्दी की असवारी सोहे, त्रिशुल हाथ में
धाऱ्या राज ।।
चालो ऐ सखियाँ... ॥१॥
भाँत-भाँत का आया बराती, कोई लूला कोई लंगड़ा
राज ।
भूत प्रेत न सागै ल्याया, शिव को रूप अनोखो राज
॥
भाँग धतूरा करै कलेवो, बिजिया खूब चढ़ावै राज
।
शिव भोले का आया बराती, पापड़ पातल खाबै राज ॥
चालो ऐ सखियाँ...॥२॥
शिव भोले को रूप देखकर, सखियाँ पाछी भागी राज।
सखियाँ यूँ कहवैन लागी, बीन्द घणों ही भुण्डो
राज ॥
गौरा बाई तो चाँद सरीसी, बीन्द कठे से आग्यो राज।
हाँस हाँस कर सारी सखियाँ, गौरा बाई न चिड़ावै राज ।
चालो ऐ सखियाँ... ॥३॥
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