सरवरिया के तीर खड़ी या, नानी नीर बहावे है ...| Bhajan - 86 | Shri Krishna Nani Bai Bhajan | Sarvariya Ke Teer Khadi Ya Naani Neer Bahave Hai ..
सरवरिया के तीर खड़ी या, नानी नीर बहावे है ।
माँ का जाया बीर बिना कुण, भात भरण ने आवे है ।।
एक दिन म्हारो भोळो बाबुल, अरबपति कहलायो थो ।
अन धन रा भण्डार घणेरा ओर छोर नहीं पायो थो ।
ऊँचा ऊँचा महल मालिया, नगर सेठ कहलायो थो ।
अणगिणती का नोकर चाकर, याद म्हने सब आवे है । सरवरिया के तीर खड़ी या ......
लाड़ प्यार में पळी लाड़ली, बड़ा घरां जद ब्याही थी ।
दान दायजो हाथी घोड़ा, दास दासियाँ ल्यायी थी ।
सोना चाँदी हीरा मोती, गाड़ा भर भर ल्यायी थी ।
बीती बाताँ याद करूँ जद, हिवड़ो भर आवे है । सरवरिया के तीर खड़ी या ......
तेरे भरोसे सेठ साँवरा, भोळो बाबुल आयो ह ।
गोपीचंदन और तूमड़ा, साधाँ ने संग ल्यायो ह ।
घर घर मांगत फिरे सूरिया, म्हारो मान घटायो ह ।
देवरियो म्हने ताना मारे, नणदल जीव जलारे ह ।। सरवरिया के तीर खड़ी या ......
और सगां ने मेल मालिया, टूटी टपरी नरसी ने ।
और सगां न शाल दुशाला, फटी गूदड़ी नरसी ने ।
और सगां ने माल मलीदा, रूखी सूखी नरसी ने ।
डूब मरूँ पर घर नहीं जाऊँ, बाबुल म्हने लजावे ह ।। सरवरिया के तीर खड़ी या ......
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