हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जिसमे तुम्हारा मंदिर हो | Bhajan 152 | He Maa Mujhko Aisa Ghar Do Jisme Tumhara Mandir Ho ...
हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जिसमे तुम्हारा मंदिर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो।
हे माँ, हे माँ, हे माँ, हे माँ, x3
जय जय माँ, जय जय माँx3 ॥
इक कमरा जिसमे तुम्हारा, आसन माता सजा रहे,
हर पल हर छिन भक्तो का वहां, आना जान लगा रहे।
छोटे बड़े का माँ उस घर में, एक सामान ही आदर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥
॥ हे माँ मुझको ऐसा घर दे...॥
इस घर से कोई भी खाली, कभी सवाली जाए ना,
चैन ना पाऊं तब तक दाती, जब तक चैन वो पाए ना।
मुझको दो वरदान दया का, तुम तो दया का सागर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो।
हे माँ, हे माँ, हे माँ, हे माँ, x3
जय जय माँ, जय जय माँx3 ॥
इक कमरा जिसमे तुम्हारा, आसन माता सजा रहे,
हर पल हर छिन भक्तो का वहां, आना जान लगा रहे।
छोटे बड़े का माँ उस घर में, एक सामान ही आदर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥
॥ हे माँ मुझको ऐसा घर दे...॥
इस घर से कोई भी खाली, कभी सवाली जाए ना,
चैन ना पाऊं तब तक दाती, जब तक चैन वो पाए ना।
मुझको दो वरदान दया का, तुम तो दया का सागर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥
॥ हे माँ मुझको ऐसा घर दे...॥
हर एक प्राणी उस घर का माँ, तेरी महिमा गाता रहे,
तू रखे जिस हाल मैं दाती, हर पल शुक्र मनाता रहे ।
कभी न हिम्मत हारे माता, चाहे शमा भयंकर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥
॥ हे माँ मुझको ऐसा घर दे...॥
हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जिसमे तुम्हारा मंदिर हो,
ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो।
हे माँ, हे माँ, हे माँ, हे माँ,
जय जय माँ, जय जय माँ।
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